मुसलमानों को आरक्षण नहीं अवसर की जरूरत: नजमा हेपतुल्ला

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ एजेंसी नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक हालत सुधारने के तमाम वादे किए थे। अब मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल में विकास की राह पर कहां खड़ा है मुसलमान और क्या है इस सरकार की भावी योजना?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 के चुनाव में मुसलमानों को एक हाथ में कुरान तो दूसरे हाथ में कंप्यूटर देने का वादा किया था। दो साल बाद इस मिशन में कितना कामयाब हुई सरकार?

इस क्रम में हमने मजबूत बुनियाद रख दी है। जल्दी ही देश को इस मजबूत बुनियाद पर ठोस इमारत खड़ी नजर आएगी। मदरसों के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत हो गई है। मोदी सरकार मुसलमानों के परंपरागत हुनर को सहेजने में भी जुटी है। ‘उस्ताद’ जैसे कार्यक्रम से अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों लोगों को नई रोशनी मिली है।

इन दो सालों में अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर में क्या सकारात्मक बदलाव आया है?
देखिये, मोदी सरकार और हमारे मंत्रालय ने इस दिशा में दीर्घकालिक योजना बनाई है। स्थिति सुधारने के लिए ठोस दृष्टि और ठोस योजना की जरूरत थी। हमने इस दिशा में काम किया है। इसके परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं।

आपको क्या लगता है, क्या है मुसलमानों की मुख्य समस्या?
मेरी नजर में मुसलमानों के पास बेशकीमती हुनर है। इसे समय के अनुरूप सजाने और संवारने की जरूरत है। इसके अभाव में परंपरागत हुनर गायब होते जा रहे हैं। क्या आपको पता है कि बनारस में अब महज 4 परिवार ही लकड़ी के खिलौने बनाते हैं? पूरे राजस्थान में अब एक ही परिवार हाथ से कागज बनाता है। कश्मीर में कई तरह की शॉल बनाने का हुनर विलुप्त होने पर है।

इसे बचाने के लिए आपका मंत्रालय क्या कर रहा है?
हमने हुनर को बचाने के लिए इसे सीधे बाजार से जोड़ने का सिलसिला शुरू किया है। अब बाजार में जाने के लिए उसकी जरूरत, प्रोडक्ट की गुणवत्ता, बेहतर डिजाइन और बेहतर पैकेजिंग की जरूरत पड़ती है। हमने इस चिंता को दूर करने के लिए निफ्ट, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन व अन्य के साथ एमओयू किया है।

आपकी सरकार पर आरोप है कि आपने सच्चर आयोग की मुख्य सिफारिश पर कुंडली मार ली, सरकार आरक्षण मामले में चुप क्यों है?
मुझे नहीं लगता कि 2-3 फीसदी आरक्षण से मुसलमानों का कोई भला होने वाला है। आप इस पूरे समुदाय को शिक्षा, व्यापार सहित सभी क्षेत्रों में समान अवसर तो दीजिए। सरकार अल्पसंख्यकों को समान अवसर उपलब्ध कराना चाहती है। लाखों की संख्या में स्कॉलरशिप, फ्री कोचिंग, मुफ्त प्रशिक्षण इसका गवाह है।

एक-दो योजनाओं को छोड़ दें तो आपकी सरकार भी यूपीए सरकार की योजनाओं के सहारे ही है, फिर नई दृष्टि का दावा कहां तक उचित है?
हमने अल्पसंख्यकों के हुनर को बचाने, उसे बाजार के अनुरूप बनाने पर ध्यान दिया। ‘उस्ताद’, ‘सीखो और कमाओ’ योजना इसकी गवाह है। जहां तक पुरानी योजनाओं की बात है तो महज योजना बना देने से समस्या खत्म नहीं होती। यूपीए सरकार में तो एक बार भी मंत्रालय का बजट खर्च नहीं किया गया। हमने 98 फीसदी बजट की राशि खर्च की।

विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। इस पर आपका क्या कहना है?
इस बारे में इतना ही कहूंगी कि इस मामले में सियासत हो रही है। प्रधानमंत्री ने हमेशा सबका साथ सबका विकास, सभी धर्मों के आदर की बात कही है। फिर जिनके कार्यकाल में हजारों सांप्रदायिक दंगे हुए उसके इस तरह के आरोपों की सच्चाई अल्पसंख्यकों को पता ह