संवैधानिक पदों पर कार्य करने वालों के लिये गीता है ‘गवर्नर्स गाइड’ – राज्यपाल

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स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ एजेंसी:
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति दिलीप बी0 भोसले, विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उपमुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डाॅ0 गुरदीप सिंह कुलपति राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ की उपस्थिति में राज्यपाल के विधि परामर्शी  एस0एस0 उपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक ‘द गवर्नर्स गाइड’ का लोकार्पण राजभवन के गांधी सभागार में हुआ।
राज्यपाल ने इस अवसर पर पुस्तक की सराहना करते हुये कहा कि राज्यपाल के दायित्वों के निर्वहन में यह पुस्तक अत्यधिक लाभदायी है। पुस्तक ‘गवर्नर्स गाइड’ का शीघ्र ही हिंदी अनुवाद होना चाहिये ताकि हिंदी भाषी क्षेत्रों में आम व्यक्ति भी इसका लाभ ले सके। उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुये कहा कि राजभवन सहित अनेक संवैधानिक, राजनैतिक एवं शैक्षिक क्षेत्रों में काम करने वालों के लिये यह पुस्तक गीता की तरह है।
 नाईक ने बताया कि जब उनकी नियुक्ति उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पद पर हुई थी तो राष्ट्रपति  प्रणव मुखर्जी ने उन्हें संविधान की प्रति देते हुये कहा था कि अब संविधान ही आपका मार्गदर्शक है और इसी के अनुसार आपको काम करना होगा। राजभवन में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुये उन्हें संविधान के अनुसार कई निर्णय करने पडे़ चाहे वह विधान परिषद में नाम निर्देशन, लोकायुक्त की नियुक्ति, मंत्री पद पर बने रहने का औचित्य या नेता विरोधी दल के मामलों सहित अन्य प्रकरण हों। ऐसे निर्णयों के कारण आम जनता का राज्यपाल जैसी संस्था पर विश्वास बढ़ा है। ऐसे निर्णय लेने में विधि परामर्शी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पुस्तक ‘गवर्नर्स गाइड’ के माध्यम से जनता को संवैधानिक संस्थाओं की कार्य प्रणाली के बारे में नजदीक से जानने का मौका मिला है। संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों के विधि परामर्शी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कानून का सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं देश, काल और परिस्थिति के अनुसार उसकी व्यवहारिकता कितनी अनुकूल होनी चाहिये, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। परामर्शदाता की छोटी से भूल अर्थ का अनर्थ कर देती है, जो विवाद का विषय बन जाता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में देश को आगे बढ़ाने के लिये हमें संकीर्णताओं से उभरना होगा।
योगी ने कहा कि लोकतंत्र में राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संवैधानिक अभिभावक के रूप में कोई भी राज्यपाल अपने दायित्वों का निर्वहन करता है तो यह लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत है। उन्होंने राज्यपाल की सराहना करते हुये कहा कि जिस प्रखरता से राज्यपाल ने अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन किया है उससे आम आदमी के बीच उनकी छवि जनता के राज्यपाल की बनी है। आमजन के बीच उन्होंने बेहतर संवाद स्थापित किया है। प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी सरकार यदि अपने मार्ग से भटकी हैं तो उन्होंने अपनी बेबाक टिप्पणी से नियंत्रित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि कुलाधिपति के रूप में भी राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति  दिलीप बी0 भोसले ने कहा कि  उपाध्याय की पुस्तक केवल राज्यपालों के लिये नहीं बल्कि न्यायाधीशों के लिये भी काम आयेगी। किताब पूरी प्रमाणिकता से लिखी गयी है जिसमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के निर्णयों के हवाले दिये गये हैं। उन्होंने  उपाध्याय की प्रशंसा करते हुये कहा कि राज्यपाल के विधि परामर्शी न्यायिक सेवा के अधिकारी हैं वे विधि के अच्छे ज्ञाता होने के साथ-साथ अच्छे लेखक भी हैं। 
विधान सभा अध्यक्ष  हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि ज्ञान ग्रंथों में लिखा है कि प्रकृति ने अपने नियम बनाये हैं। नियम से जीवन आनन्द से भर जाता है। प्रत्येक देश की परम्परा के अनुसार उसका संविधान बनता है। उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुय कहा कि सुसंगत पुस्तक लिखना वास्तव में मुश्किल काम है।
उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य ने पुस्तक की तारीफ करते हुये कहा कि यह पुस्तक समाज को दिशा देने वाली पुस्तक है जिससे लोकतंत्र को ताकत मिलेगी। 
उपमुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक अनुभव और शोध का समागम है। विधि सम्मत व्यवहार न करने से विसंगति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने विधि के अनुसार अपनी बात को रखकर लोकतंत्र में मान्यता दिलाई है।

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