शादी के लिए नहीं मिलेंगी 8 नवंबर के बाद जमा रकम

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ / एजेंसी:

कोरबा। अग्नि के सात फेरों से कुछ कदम दूर दुल्हा-दुल्हन के रास्ते में एक बार फिर शर्तों का स्पीड ब्रेकर मुश्किलें खड़ी कर रहा। शादी के लिए केंद्र शासन ने ढाई लाख निकालने की सहूलियत तो दी, पर साथ में नियम भी रख दिया कि 8 नवंबर के बाद अपने खाते में जमा किए गए रुपए इस काम के लिए नहीं निकाले जा सकेंगे। 8 नवंबर या उससे पहले अपने खाते में जमा रकम ही कैश कराकर मांगलिक कार्यों में खर्च के लिए निकालने की अनुमति दी जा रही है।

आरबीआई से बैंकों को जारी सर्कुलर के मुताबिक नोटबंदी के निर्णय के दिन तक, यानि 8 नवंबर या उससे पहले अपने खाते में ढाई लाख रखने वाले परिवार ही यह रकम एकमुश्त निकाल सकेंगे। इस तिथि के बाद यानि 9 नवंबर से खाते में डिपॉजिट किए गए पुराने नोट शादी की जरूरत बताते हुए पुनः खाते से एकमुश्त आहरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस नियम की वजह से लोगों की मुश्किल हल होने की बजाय अब और बढ़ती दिखाई दे रही है। लोग अपने खाते में जमा रकम को निकालने बैंकों के चक्कर लगाने मजबूर हो रहे हैं, पर उनकी परेशानियों का हल बताने वाला कोई नहीं। सर पर शादी और जेब में रुपए न हो, तो मांगलिक कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे परिवार पर कितना तनाव है, इसका अंदाजा वही लगा सकते हैं, जो विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हों। ऐसे खुशी के मौके पर इन दिनों पुराने नोट इस्तेमाल न कर पाने की मजबूरी और नए व चिल्हर नोटों की कमी को लेकर लोग चिंचित हैं। कैश की मुसीबत से जूझ रहे परिवारों के लिए प्रचारित की गई ढाई लाख निकालने की सुविधा अब हवा-हवाई साबित हो रही।

प्रमाण के साथ सेल्फ डिक्लीयरेशन

मांगलिक कार्य के लिए अधिक रकम निकालने की दी जा रही सुविधा का लाभ उठाने प्रूफ के तौर पर बैंक में शादी का इनविटेशन कार्ड जमा कराना होगा। इसके अलावा बैंक के समक्ष अपने खाते से रकम निकालने वाले को सेल्फ डिक्लीयरेशन याने स्वयं प्रमाणित पत्र या आवेदन भी प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद कार्ड, पासबुक, परिचय पत्र और सेल्फ डिक्लीयरेशन का परीक्षण करने के बाद बैंक उन्हें रकम निकालने की अनुमति प्रदान कर देगा। बैंक प्रबंधन उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर बड़ी रकम आहरण करने की औपचारिक जानकारी वित्त मंत्रालय को प्रस्तुत कराएगा।

स्टाम्प पर शपथ पत्र की जरूरत नहीं

ऐसे वक्त में जरूरतमंद परिवारों को सुविधा प्रदान करने किसी प्रकार की कठिन औपचारिकताएं व दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित परिवारों को रकम निकालने के लिए साधारण पेपर पर स्व प्रमाणन और केवल शादी का कार्ड ही प्रस्तुत करना होगा। आमतौर पर किसी प्रकार के सत्यापन के लिए स्टाम्प पेपर पर तैयार कराए जाने वाले शपथ पत्र प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह नई सुविधा प्रदान किए जाने से मांगलिक कार्यों की तैयार कर रहे परिवारों को काफी हद तक राहत मिल सकेगी, बैंक के अधिकारी ऐसी उम्मीद जता रहे हैं।

एसओपी पढ़ने फुर्सत में नहीं कई बैंक

केंद्र सरकार ने जहां शादी वाले परिवारों की चिंता समझते हुए एक विकल्प सुझाया और त्वरित कार्रवाई करते हुए लीड बैंक समेत सभी संस्थाओं को आरबीआई ने स्टेंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीडर (एसओपी) जारी कर दिए। आरबीआई से जारी एसओपी के आधार पर लीड बैंक एसबीआई ने भी अपनी सभी शाखाओं को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सहूलियत के विपरीत आज भी ऐसे कई बैंक हैं, जिनके पास एसओपी जारी होने के चार दिन बाद भी पालन करना तो दूर, संचालन की प्रक्रिया के बारे में दिशा-निर्देश को पढ़ने तक का वक्त नहीं निकाल सके हैं। यही वजह है जो दिशा-निर्देश न होने का हवाला देकर शादी वाले परिवारों को चक्कर काटने मजबूर होना पड़ रहा।

एक माह पहले डिपॉजिट पर हो पात्रता

विमुद्रीकरण की घोषणा करते हुए पीएम ने 8 नवंबर को बैंक बंद होने के बाद एक हजार व 500 रुपए के पुराने नोट प्रचलन से बाहर किए जाने की जानकारी दी। शर्त के अनुसार अघोषित आय को खपाने वालों को रोकने 8 नवंबर के बाद जमा की गई रकम को शादी के लिए निकालने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसकी वजह से वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को पिसना पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार इसका विकल्प कुछ इस तरह निकाला जा सकता है कि नोटबंदी की घोषणा की तिथि से एक माह पहले तक अपने अकाउंट से आहरण करने वाले परिवारों को शादी की जरूरत बताते हुए निर्धारित ढाई लाख की रकम निकालने की सहूलियत पर विचार किया जा सकता है।

रकम है पर निकालने बैंक का इंकार

व्यवसायी राजेश गुप्ता ने बताया कि उनके साले की शादी 24 नवंबर को तय हुई है। इस शादी को लेकर जहां एक तरफ खुशी का माहौल है, दूसरी ओर पूरा परिवार इन दिनों इस चिंता में है कि कार्यक्रम के लिए सैकड़ों काम निपटाने कैश कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि शादी वाले परिवार को खाते से ढाई लाख निकालने की सहूलियत के बारे में पता चला तो सुविधा का लाभ लेने बैंक के दरवाजे भी खटखटाए गए, पर बैंक ने यह शर्त रखते हुुए इंकार कर दिया कि 8 नवंबर के बाद जमा किए गए नोटों के बदले उन्हें यह रकम निकालने की सुविधा नहीं मिल सकेगी। यह समस्या किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि कई लोग परेशान होकर भटक रहे।

पहले निकाला फिर जमा किए, अब क्या करें

अमितोष ने बताया कि उनकी बहन की शादी तय हो चुकी है। अगले माह सगाई और उसके कुछ दिन बाद होने वाली शादी के लिए खरीदारी से लेकर अन्य तैयारियों के ढेरों काम हैं। शादी लगभग पक्की होने पर खर्च के लिए उनके परिवार ने बैंक से रकम निकलवाई, जिसके कुछ दिन बाद ही एक हजार व 500 रुपए के पुराने नोट प्रचलन से बाहर किए जाने की घोषणा हो गई। मजबूरन घर पर रखे रुपए फिर से बैंक खाते में जमा करानी पड़ीृ ताकि जरूरत के वक्त बाद में नई करेंसी निकाल सकें। जब ढाई लाख की बात आई, तो कुछ राहत मिली थी पर 8 नवंबर के बाद जमा करने वालों को सुविधा नहीं मिलने की शर्त के बाद अब क्या करेंगे, यह समझ नहीं आ रहा।

आरबीआई से जारी सर्कुलर के अनुसार 8 नवंबर तक खाते में जमा रकम पर शादी के लिए ढाई लाख निकालने की सुविधा ग्राहकों को मिल सकेगी। इस तिथि के बाद जमा किए गए नोटों के बदले रकम निकालने की अनुमति नहीं है। सभी बैंकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और शादी के केस आने पर गाइड लाइन के मुताबिक सुविधा का लाभ प्रदान करने यथासंभव ग्राहकों का सहयोग किया जा रहा है।

– प्रभास बोस, क्षेत्रीय प्रबंधक, एसबीआई