अब सांसद-विधायक कोटे से बन सकेगी गली-मोहल्लों की सड़कें, पटना मेट्रो की बनी नयी नीति

स्टेटमेंट टुडे / समाचार एजेंसी:
अब्दुल बासित / ब्यूरो मुख्यालय : पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक की. समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आज दो विभागों की समीक्षा की गयी. उन्होंने बताया कि शहरों के मुहल्लों की सड़कों की मरम्मत और निर्माण में अब विधायक एवं सांसद निधि के तहत किया जा सकता है. साथ ही सिवरेज, ड्रेनेज एवं जलापूर्ति योजनाओं में किसी भी सड़क पर ढाई सौ मीटर से आगे कार्य करने के पूर्व कटी हुई सड़क का पूर्ण रेस्टोरेशन को अनिवार्य बनाने के लिए दिशा-निर्देश निर्गत करने पर सहमति दी गयी. वहीं, पटना में मेट्रो के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नयी मेट्रो नीति बनायी गयी है, उसी के आधार पर राज्य सरकार अपने प्रस्ताव में सुधार कर केंद्र सरकार को भेजेगी. 
भूमि का कराया जा रहा हवाई सर्वेक्षण, सभी राजस्व नक्शे किये गये डिजिटाइज्ड : उन्होंने बताया कि बिहार में भूमि का हवाई सर्वेक्षण कराया जा रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा राज्य का भू-कर संबंधी सर्वेक्षण एवं संशोधन सर्वेक्षण से संबंधित सभी राजस्व नक्शे को डिजिटाइज्ड कर दिया गया है. भू-अर्जन से संबंधित राशि का अब ससमय भुगतान हो सकेगा. राशि को खाते में निकाल कर रखी जानेवाली परंपरा समाप्त होगी. साथ ही भू-अर्जन में भूमिपति किसान को आरटीजीएस के माध्यम से राशि दी जायेगी. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के संबंध में निर्णय लिया गया है कि पुलिस प्रशासन, राजस्व प्रशासन एवं नगर निकायों के दायित्वों को जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. 
पटना का मास्टर प्लान तैयार : नगर विकास एवं आवास विभाग की बैठक के संदर्भ में मुख्य सचिव ने कहा कि पटना का मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है. वहीं, अन्य शहरों के लिए भी मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. इससे नक्शा पास करने तथा उसे रेगुलेट करने में सहुलियत होगी. 
नयी मेट्रो नीति बनी : पटना मेट्रो के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नयी मेट्रो नीति बनाया गया है. उसी के आधार पर राज्य सरकार अपने प्रस्ताव में सुधार कर केंद्र सरकार को भेजेगी. 
कचड़ा प्रबंधन के लिए बनाये गये दो मॉडल : कचड़ा प्रबंधन के संबंध में उन्होंने बताया कि कचड़ा प्रबंधन के लिए दो मॉडल मुजफ्फरपुर मॉडल एवं सिलाव मॉडल बनाये गये हैं. सिलाव मॉडल छोटे स्तर पर कचड़ा प्रबंधन के लिए है. इसमें हर दुकानदार को दो प्लास्टिक की बाल्टी दी जाती है, जिसमें वह सूखा एवं गीला कचड़ा अलग-अलग रखते हैं. 
अब खेती में होगा शहर की नाली के पानी का उपयोग : शहर की नाली के पानी को ट्रिटमेंट करने के बाद उसका उपयोग अब खेती के लिए किया जायेगा. विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी है. 
सांसद व विधायक निधि से बनेगी मुहल्लों की सड़कें : मुख्य सचिव ने बताया कि शहरों के मुहल्लों के अंदर की बड़ी सड़कें जो दो-तीन वार्ड से गुजरती है, वैसी सड़कों की मरम्मत और निर्माण के संबंध में यह निर्णय लिया गया कि वैसे सड़कों को अब विधायक एवं सांसद निधि के तहत लिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि सिवरेज, ड्रेनेज एवं जलापूर्ति योजनाओं में किसी भी सड़क पर ढाई सौ मीटर से आगे कार्य करने के पूर्व कटे हुए रोड का पूर्ण रेस्टोरेशन को अनिवार्य बनाने के लिए दिशा-निर्देश निर्गत करने पर सहमति दी गयी.
समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, संबंधित विभागों के मंत्री-राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन आमिर सुबहानी, प्रधान सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विवेक कुमार सिंह, प्रधान सचिव नगर विकास एवं आवास चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे.