जैसलमेर की पहली महिला RPS बनी प्रेम धनदेव, बड़ी बहन है जिला प्रमुख

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ / एजेंसी :


जैसलमेेर। पर्यटन नगरी के नाम से जैसलमेर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पहले इस जिले को ‘बेटी मारने’ वाले जिले के नाम से भी जाना जाता था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं और जिले की बेटियों ने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में जैसलमेर का नाम रोशन किया है। जैसलमेर जिले की एक दलित परिवार की बेटी  प्रेम धनदेव ने जिले की पहली महिला RPS बनकर पूरे  जिले को गौरवान्वित किया है। 

बेटी पैदा होते ही मार देने का था रिवाज

जैसलमेर एक पर्यटन नगरी है और पूरे देश दुनिया के सैलानी यहां पर इसकी खूबसूरती को निहारने के लिए हर साल आते हैं। जिस तरह सिक्के के दो पहलु होते हैं वैसे ही इस जैसलमेर के भी दो पहलु हैं। एक ओर जहां ये पूरी दुनिया में स्वर्ण नगरी के नाम से जानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ ये जिला बेटी को पैदा होते ही मारने के रिवाज पर कुख्यात भी रहा है। यहां के एक गांव में 150 साल बाद कोई बारात आई थी। और लोग इस जिले को बड़ी हेय दृष्टि से भी देखते थे, लेकिन वक़्त बदला तो इंसान भी बदले हैं और आज-कल यहां की बेटियां पूरे देश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। 

6 बेटियों का धनदेव परिवार बना मिसाल

जैसलमेर का एक ऐसा ही दलित परवार अपने आप में जैसलमेर जिले की पहचान बन गया है और वो चेलक गांव का धनदेव परिवार। कांग्रेस के लीडर और पीसीसी सचिव रूपा राम धनदेव के परिवार में 6 बेटियां है और सभी अपने अपने फील्ड में अपना नाम रोशन कर रही हैं। जहां उनकी सबसे बड़ी बेटी अंजना मेघवाल जैसलमेर जिले की जिला प्रमुख हैं, वहीं बाकी तीन बेटियां डॉक्टर हैं। एक बेटी अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढाई कर रही है। इन छह बेटियों में एक बेटी प्रेम धनदेव इन दिनों पूरे राजस्थान में अपने नाम का परचम लहरा रही हैं।

प्रेम जैसलमेर जिले की पहली महिला RPS हैं और फिलहाल अभी अंडर ट्रेनिंग हैं। और गर्व की बात तो ये है कि अभी हाल ही में जयपुर में हुई पुलिस परेड में उसने छ प्लाटून में से एक प्लाटून का परेड में नेतृत्व कर जिले को गौरवान्वित कर दिया। और प्रेम इसके लिए अपने मां-बाप को धन्यवाद देती है, उनकी ही वजह से आज वो इस मुकाम तक पहुंच पाई है। 

पिता रूपाराम को अपनी बेटियों पर है गर्व

प्रेम के पिता रूपा राम धनदेव का कहना है की बेटी होना अब अभिशाप नहीं रहा।  लोग मुझे कहते थे की आपके 6 बेटियां हैं और अब क्या होगा ? क्योंकि मां-बाप को बेटी होते ही उसके दहेज़ और शादी की चिंता सताती है, लेकिन मैंने इन सबको दरकिनार करके अपनी बेटियों को पढाया लिखाया और समाज की धारा के विपरीत जाकर इनको इस काबिल बनाया है कि  लोग आज इनकी मिसाल देते हैं और अपनी बेटियों को भी इनकी तरह बनने की प्रेरणा देते हैं। 

भाई को अपनी 6 बहनों पर है फक्र

वहीं 6 बहनों के एक मात्र भाई हरीश का कहना है की लोगों का बेटियों के प्रति अब नजरिया बदलना चाहिए, क्योंकि अब वो हर क्षत्रे में सबसे आगे निकल रही हैं और मुझे गर्व है कि मेरी बहन जैसलमेर जिले की पहली महिला RPS है।