यूपी चुनाव में 3 बुंदेलखंडी महिलाएं

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ / एजेंसी :

बांदा। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सभी पार्टियां राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई हैं। इस चुनाव में राज्य के बहुत ही पिछड़े और सूखाग्रस्त क्षेत्र बुंदेलखंड से कुछ ऐसी महिलाएं भी राजनीति के मैदान में अपनी किस्मत आजमाने की जुगत में हैं, जो जमीन से जुड़ी हुई हैं, और अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिए जानी-पहचानी जाती हैं।

बुंदेलखंड से फिलहाल तीन महिलाओं के इस चुनाव मैदान में उतरने की संभावना दिखाई देती है। इनमें संपत पाल, पुष्पा गोस्वामी और शीलू निशाद शामिल हैं। बदोसा की संपत पाल (50) अपने गुलाबी गैंग के बूते दूर-दूर तक पहचानी जाती हैं। गुलाबी रंग की साड़ी और लठ तो अब उनकी पहचान बन चुकी है। संपत इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट की आश लगाए बैठी हैं और उन्होंने अपना जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है।

संपत इसके पहले भी दो बार विधायकी का चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्होंने 2008 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। संपत घर-घर जाकर केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार की योजनाओं पर सवाल उठा रही हैं। वह सितंबर में राहुल गांधी की खाट सभा में भी मौजूद थीं।

संपत भाजपा की नीतियों के बारे में कहती हैं, कोलों के रहने के लिए जगह नहीं है और स्वच्छ भारत के नाम पर बनने वाले शौचालयों में गड्ढे नहीं हैं। ऐसे हो रहा है भाजपा का स्वच्छ भारत। हंसमुख और बुलंद आवाज वाली संपत बुंदेलखंडी भाषा में गीत गाकर कांग्रेस का प्रचार कर रही हैं। दूसरी तरफ बांदा की पुष्पा गोस्वामी (48) बेलन गैंग की मुखिया और भाजपा की समर्थक हैं।

पतली कद-काठी की पुष्पा बांदा की गलियों में महिलाओं की मदद के लिए अपने बेलन गैंग के साथ घूमती रहती हैं। बेलन गैंग की शुरुआत 2008 में हुई थी। पुष्पा इसकी कहानी बताती हैं, मेरे पास वाल्मीकि समाज की कुछ महिलाएं बिजली न होने की शिकायत लेकर आई थीं। मैं बिजली विभाग के एक्सीयन साहब के पास गई। उनके गलत तरह से बात करने पर मैंने पास में समोसे बना रहे हलवाई का बेलन उठाकर उन पर मार दिया। उसके बाद हमारी पहचान बेलन फौज के रूप में होने लगी।

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