एक अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्स की किताबों की फोटोकॉपी को कॉपीराइट कानून का उल्लंघन नहीं माना है. हाईकोर्ट ने प्रकाशकों के समूह की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय और फोटोकॉपी की दुकानों पर कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था. फैसला सुनाते हुए जस्टिस राजीव सहाय एंडला ने कहा, ‘कॉपीराइट का अधिकार कोई दैवीय अधिकार नहीं है.’ उन्होंने कहा है कि इसका मकसद ज्ञान को बढ़ावा देना है न कि इसमें बाधा डालना. 94 पेज के फैसले में अपने कॉलेज के दिनों का अनुभव साझा करते हुए जस्टिस एंडला ने कहा कि कॉपीराइट अधिनियम की धारा-52 के तहत छात्रों को कॉपीराइट कानून की बाध्यताओं से छूट हासिल है, वे दिल्ली विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी या दुकानों से कोर्स में शामिल किताबों की फोटोकॉपी ले सकते हैं.

अदालत ने कहा कि कॉपीराइट कानून में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए फोटोकॉपी के इस्तेमाल को छूट दी गई है, इसलिए इस याचिका पर आगे सुनवाई करने का कोई मतलब नहीं है. हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार चूंकि दिल्ली विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किताबों की फोटोकॉपी का इस्तेमाल किया है जिसका कोई व्यवसायिक उद्देश्य नहीं है, इसलिए यह प्रकाशकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं है.

2012 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस और टेलर एंड फ्रेंसिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ-साथ रामेश्वरी फोटोकॉपी सर्विस को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. तब हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया था और फोटोकॉपी की बिक्री पर रोक लगा दी थी. हालांकि, अब हाईकोर्ट ने कहा कि फोटोकॉपी करने वाली दुकान विश्वविद्यालय के लाइसेंस पर चल रही है, इसलिए उसे भी विश्वविद्यालय जैसी छूट हासिल हो जाती है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक प्रकाशकों ने संयुक्त बयान जारी कर इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा है कि कोर्ट के फैसले से शिक्षकों और छात्रों के लाभ के लिए मूल सामग्री की उपलब्धता कमजोर होगी.