उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की मुहिम के बाद भाजपा ने गोहत्या पर अधिकतम मौत की सजा देने वाला विधेयक शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया है. हालांकि इसे पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से निजी विधेयक के रूप में लाया गया है.
गौ संरक्षण विधेयक, 2017 में गायों की संख्या स्थिर रखने और गोहत्या को रोकने के लिए एक प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव किया गया है. इस विधेयक में महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि राष्ट्रपिता की भी इच्छा थी कि गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाया जाए.
इस विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 48 को लागू करने के लिए एक प्राधिकरण बनाने का भी प्रस्ताव है. प्राधिकरण में पशुधन सचिव के अलावा कृषि अर्थशास्त्र, पशु कल्याण और प्राचीन इतिहास और संस्कृति जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के पांच मशहूर लोग बतौर सदस्य होंगे.
इस अनुच्छेद में सरकार पर गायों और बछड़ों के अलावा अन्य दुधारू और सामान ढोने वाले पशुओं की नस्लों के संरक्षण की जिम्मेदारी डाली गई है. इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार ऐसे पशुओं की हत्या रोकने के लिए कदम उठाएगी. यह अनुच्छेद संविधान के राज्य के नीति-निदेशक तत्व का हिस्सा है जिसे लागू करवाने के लिए किसी भी न्यायालय की सहायता नहीं ली जा सकती. ऐसे में इसमें निर्देशित तथ्यों को लागू करवाने के लिए अलग से कानून बनाना पड़ता है.