निजी स्कूलों को दी जाने वाली फीस प्रतिपूर्ति की गणना आरटीई अधिनियम-2009 की धारा 12(2) के अनुसार की जनि चाहिए : डाॅ. मधुसूदन दीक्षित

स्टेटमेन्ट टुडे / समाचार एजेंसी:
अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, उत्तर प्रदेश शासन यदि निजी असहायतित स्कूलों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत दाखिले के लिए आदेश दे रहा है तो उसे स्वयं भी उसी शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(2) का पालन करते हुए तमिलनाडु सरकार की तरह ही उत्तर प्रदेश सरकार भी शैक्षिक सत्र 2013-2014, 2014-2015, 2015-2016, 2016-2017 तथा 2017-2018 के लिए सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चे पर प्रति वर्ष होने व्यय को अपने सरकारी गजट में प्रकाशित करना चाहिए। और उसी के अनुसार निजी असहायतित स्कूलों को 2013 से लेकर अब तक की बकाया धनराशि की प्रतिपूर्ति का भुगतान करें तभी उत्तर प्रदेश के निजी असहायतित स्कूल आगामी शैक्षिक वर्ष 2018-2019 में अपने स्कूल में आर.टी.ई. के तहत प्रवेश लेंगे। इस संबंध में इन्डिपेंडेन्ट स्कूल फेडरेशन आॅफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना एक प्रत्यावेदन भेजा है। यह जानकारी इन्डिपेंडेन्ट स्कूल फेडरेशन आॅफ इंडिया के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डाॅ. मधुसूदन दीक्षित ने दी। डाॅ. दीक्षित ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) के अन्तर्गत तमिलनाडु सरकार द्वारा 24 जुलाई 2017 को अपने सरकारी स्कूलों पर प्रति छात्र खर्च को अपने सरकारी गजट (असाधारण) में प्रकाशित किया गया है। 
डाॅ. दीक्षित ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार सरकारी स्कूलों में प्रति माह प्रति बालक होने वाले व्यय तथा संबंधित निजी स्कूल की प्रति छात्र मासिक फीस की धनराशि में से जो भी कम होगी वह धनराशि सरकार द्वारा निजी स्कूल को प्रतिपूर्ति के रूप में दी जानी है जबकि उत्तर प्रदेश शासन ऐसा नहीं कर रहा है। डाॅ. दीक्षित ने बताया कि निजी असहायतित स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के सम्बन्ध में दिनाँक 20 जून 2013 को जारी शासनादेश के द्वारा केवल शैक्षणिक सत्र 2013-2014 हेतु प्रतिपूर्ति धनराशि प्रति बालक केवल 450/- रूपये प्रति माह निर्धारित की गई थी, जिसकी गणना शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) के अनुसार नहीं की गई है। अतः निजी स्कूलों को शैक्षिक वर्ष 2013-2014 के लिए 450/- रूपये की प्रतिपूर्ति धनराशि स्वीकार नहीं हैं। यह किसी भी नियम के अन्तर्गत नहीं है। यही नहीं शैक्षणिक सत्र 2013-2014 के बाद अभी तक शैक्षणिक सत्र 2014-2015, 2015-2016, 2016-2017 तथा 2017-2018 के लिए शासन द्वारा प्रतिपूर्ति धनराशि की गणना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) में दिये गये फार्मूले के अनुसार नहीं की गई है।
डाॅ. दीक्षित ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन में साल भर में एक बार जहां वेतनवृद्धि की जाती है तो वहीं साल में कम से कम दो बार उनकी महंगाई भत्ते की धनराशि में भी वृद्धि की जाती है। इसके साथ ही साथ वर्ष 2016 में सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन देने के कारण भी सरकारी शिक्षकों के वेतन में काफी अधिक वृद्धि हो चुकी है। साथ ही साथ पिछले 5 वर्षों में महंगाई वृद्धि के कारण भी अन्य सरकारी खर्चों की धनराशि में भी काफी वृद्धि हो चुकी हैं। यहाँ यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति हेतु दी जाने वाली धनराशि की गणना में इन सभी खर्चों को शामिल किया जाना होता है, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। सरकार ने 2013 से लेकर अभी तक किसी भी वर्ष यह नहीं बताया कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा पर उनके द्वारा प्रति बालक प्रति वर्ष कितनी धनराशि व्यय की जा रही है तथा निजी स्कूल की वार्षिक फीस में से जो भी कम है, वह धनराशि शासन द्वारा निजी स्कूल को प्रतिपूर्ति के रूप में दी जायेगी। जिसके आधार पर ही फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि की गणना की जाती है।
डाॅ. दीक्षित ने बताया कि यह भी अत्यन्त उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में 2013 और 2017 के बीच भारी गिरावट आई है, तकरीबन 30 लाख बच्चे कम हुए हैं (DISE डेटा के State Report Cards के अनुसार), जिसकी वजह से भी सरकारी प्रति छात्र खर्चा अत्यधिक बढ़ गया है। प्राइवेट स्कूलों में भी खर्चा बेतहाशा बढ़ गया है लेेकिन सरकार अभी भी प्रतिपूर्ति विधिवत सही गणना के आधार पर नहीं दे रही है।
डाॅ. दीक्षित ने बताया कि निजी स्कूलों के लिए अत्यन्त ही दुर्भाग्य की बात है कि एक ओर जहाँ हमारे निजी स्कूल प्रदेश सरकार की मदद करते हुए अपने प्रदेश के बच्चों को न केवल सर्वोत्तम गुणात्मक शिक्षा प्रदान कर रहें हैं बल्कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रदेश व देश के विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहें हैं। वहीं दूसरी ओर शासन द्वारा उनके साथ पिछले कई वर्षों से फीस प्रतिपूर्ति की गणना आरटीई अधिनियम-2009 की धारा 12(2) के अनुसार न करके उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्हें शैक्षिक सत्र 2013-2014 के लिए 20 जून 2013 के शासनादेश द्वारा निर्धारित प्रतिपूर्ति की धनराशि केवल रूपये-450/- मासिक दी जा रही है। जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) का सरासर उल्लघंन है।
डाॅ. दीक्षित ने यह भी बताया कि हमने मुख्य मंत्री से यह निवेदन भी किया है कि उत्तर प्रदेश के लिए निजी स्कूलों को दी जाने वाली फीस प्रतिपूर्ति की गणना भी पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से आरटीई अधिनियम-2009 की धारा 12(2) के अनुसार करके निजी स्कूलों को इससे जुड़े हुए तथ्यों को सभी समाचार पत्र एवं सरकारी गजट के माध्यम से भी अवगत कराना चाहिए कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए जो धनराशि शासन द्वारा तय की गई है उसकी गणना किन सरकारी आंकड़ों एवं तथ्यों के आधार पर कितनी की गई है।