उत्तर प्रदेश : स्टार कालेज स्कीम के तहत प्रदेश के 02 कालेज चयनित

Statement Today 
अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय में स्नातक शिक्षा को विकसित व रुपांतरित करने हेतु स्टार कालेज योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत वर्तमान में प्रदेश के 02 कालेजों पहला यू.पी. कालेज वाराणसी दूसरा डी.जी.पी.जी. कालेज कानपुर को स्टार कालेज स्कीम द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कुमार कमलेश ने दी। उत्तर प्रदेश में विज्ञान संकाय क्षेत्र में कुल 97 राजकीय स्नातक/स्नाकोत्तर महाविद्यालय 54 जनपदों में स्थित है। इसके दृष्टिगत प्रदेश के अधिक से अधिक कालेज इस योजना से लाभान्वित कराने हेतु परिषद द्वारा सभी महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य/विज्ञान शिक्षक हेतु कार्यशाला आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। कार्यशाला में महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य/विज्ञान शिक्षक को स्टार कालेज स्कीम के संबंध एवं लाभ हेतु अवगत कराते हुए योजना का प्रस्ताव तैयार कराने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इस स्कीम द्वारा महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय में स्नातक शिक्षा को उत्कृष्ट बनाने हेतु उनकी ब्रांडिंग करना मुख्य उद्देश्य है। इस योजना के अंतर्गत महाविद्यालयों में जहां पर 4 से 5 विज्ञान के विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जैसे वनस्पति विज्ञान (बाॅटनी), जंतु विज्ञान (जूलाॅजी), व्यावहारिक जैविक विज्ञान (अपलाइड लाइफ सांइस), अणु विज्ञान (माइक्रोबायोलाॅजी), शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलाॅजी), जैवरासायनिक (बायोकेमेस्ट्री), जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलाॅजी) आदि। इन कालेजों में निम्न को सुदृढ़ करने हेतु जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। विज्ञान की प्रयोगशालाओें, पुस्तकालयों, टीचिंग एड्स, पड़ोसी संस्थानों के साथ नेटवर्किंग करना, हैंडस-आॅन-ट्रेनिंग तथा लघु शोध परियोजनाओं हेतु विज्ञान संकाय में स्नातक  छात्रों हेतु आदि। 
स्टार कालेज स्कीम का मुख्य लक्ष्य स्नातक छात्रों को विज्ञान के प्रयोगात्मक प्रदर्शन व प्रयोग द्वारा उन्हे विज्ञान में उच्च शिक्षा लेने हेतु प्रेरित किया जाना है। अतः इस स्कीम को बढ़ावा दिए जाने से विज्ञान पाठ्यक्रम को उत्कृष्ट बनाने पर छात्रों को प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिलाया जा सकता है और साथ ही विज्ञान विषय की अवस्थापना को भी सुदृढ़ करना, प्रयोग हेतु उपभोगीय उपकरण (बवदेनउंइसमे) उपलब्ध कराना तथा विज्ञान शिक्षकों की योग्यता बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराना होगा।
इस स्कीम के अंतर्गत केवल एक बार 10 लाख रुपये अनावर्ती अनुदान प्रत्येक विज्ञान विभाग हेतु, 03 लाख रुपये आवर्ती अनुदान प्रत्येक विज्ञान विभाग प्रतिवर्ष, (प्रति वर्ष प्रगति संतोषजनक होने पर आवर्ती अनुदान तीन वर्षों हेतु दिया जाएगा) तथा 01 लाख रुपये प्रति कालेज परामर्श एवं अनुश्रवण हेतु वित्तपोषित किया जाता है।