हाईकोर्ट में दो दिवसीय राज्य स्तरीय विधिक नयायिक अधिकारियों का सम्मेलन-2017 शुरू

स्टेटमेंट टुडे / समाचार एजेंसी:
अब्दुल बासित/ब्यूरो मुख्यालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में आज प्रदेश की न्याय व्यवस्था को और सक्षम व गतिमान करने के लिए एक दो दिवसीय राज्य स्तरीय विधिक न्यायिक अधिकारियों का सम्मेलन-2017 का शुभारम्भ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज न्यायमूर्ति जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर तथा सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति जस्टिस आर.के. अग्रवाल एवं जस्टिस आशेक भूषण तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बी0 भोसले और न्यायिक सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल ने दीप जलाकर किया।
दो दिवसीय सम्मेलन के आज प्रथम दिन जमानत और इण्टर लोक्यूटरी आदेशों न्यायिक विवेक पर न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल, जज इलाहाबाद हाईकोर्ट और सत्र के अध्यक्ष ने विषय प्रावर्तन करते हुए कहा कि न्यायिक विवेक का प्रयोग कानून सम्मत, तर्कसंगत, सीमाओं के अन्तर्गत होना चाहिए। इस विषय पर न्यायिक अधिकारियों को न्यायमूर्ति डी0के0 उपाध्याय, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, न्यायमूर्ति राजन राय, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने भी सम्बोधित किया। प्रतिनिधि वक्तागण नलिन कुमार श्रीवास्तव, श्रीमती नीतू पाठक ने भी सत्र को सम्बोधित किया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर ने व्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर डालते हुए कहा कि इसे निष्पक्ष न्याय व्यवस्था ही सुनिश्चित कर सकती है। आम आदमी सबसे पहले अधीनस्थ न्यायालय के माध्यम से न्याय व्यवस्था से परिचित होता है इसलिए अधीनस्थ न्यायपालिका को असंदिग्ध निष्ठावान होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति दिलीप बी0 भोसले ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया, जिसके बाद मुख्य अतिथि ने एक हैण्डबुक का विमोचन भी किया।
दूसरे सत्र में विचार-विमर्श के लिए चयनित विषय ‘‘मध्यस्थता में न्यायिक अधिकारियों, मध्यस्थों, वकीलों और वादकारियों को जागरूक बनाये जाने’’ को रखा गया था। इस विषय पर सत्र के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा सह अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस0 के0 गुप्ता ने सम्बोधित किया। पैनल वक्ताओं में न्यायमूर्ति बी0 अमित स्थलेकर, न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुनीत कुमार, न्यायमूर्ति श्रीमती विजय लक्ष्मी तथा न्यायमूर्ति संजय हरकौली ने अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र में हाईकोर्ट इलाहाबाद के एडवोकेट नीरज उपाध्याय जो मध्यस्थता के कार्यों में विशद अनुभव रखते हैं ने विवाद के समाधान के वैकल्पिक विधियों की प्रक्रिया और समाधान प्राप्त करने के रास्तों पर गम्भीर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि सी0पी0सी0 की धारा-89 कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर विवादों को सुलझाने के लिए पर्याप्त शक्ति प्रदान करती है। 
तीसरे सत्र में प्रशासनिक एवं वित्तीय समस्याओं एवं समाधानों के विषय पर अध्यक्षता न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और सह अध्यक्षता न्यायमूर्ति ए0के0 त्रिपाठी ने की। पैनल वक्ताओं में न्यायमूर्ति डी0के0 अरोड़ा, न्यायमूर्ति ओम प्रकाश सप्तम और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वितीय शामिल थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मोहम्मद फैज आलमखान ने प्रतिनिधि वक्ता के रूप में प्रशासनिक और वित्तीय कठिनाइयों को रेखांकित किया।