बेरोजगारी चरम पर: नोटबंदी के बाद घर लौटने लगे मजदूर!

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ / एजेंसी :

जयपुर। भले ही नोटबंदी कर मोदी सरकार लोगों को भ्रष्टाचार को मुक्त कर लोगों को नित न ए सपने दिखा रही हो लेकिन बेराजगारी चरम पर पहुंच गई। मजदूर शहरों से गांवोें की तरफ लौटने लगे हैं। सैकड़ों मजदूर रोज सुबह शहर की विभिन्न चौकटियों में काम धंधे की आस में खड़े होते हैं। सवाईमाधोपुर के रमेश कारीगर ने बताया कि नोटबंदी से पहले वह रोज पांच सौ रुपए आसानी से कमा लेता था, लेकिन डेढ़ महिने से दो तीन दिन ही मुश्किल से काम मिला है। रोटी के लाले पड़े हुए हैं। वहीं मकान मालिक किराए के लिए रोज परेशान कर रहा है।

उसके कई साथी रोजगार नहीं मिलने के कारण गांव जा चुके हैं। गांव में भी कोई रोजगार नहीं है। इसलिए किसी तरह रूके हुए हैं। शायद कोई काम मिल जाए। यहीं हालत अन्य मजदूरों की भी है। नोटबंदी के बाद आम आदमी के सामने रोटी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। मजदूर वर्ग को रोजगार नहीं मिलने से रोटी के लाले पड़े हुए हैं। चौकटियों पर खड़े मजदूर रोजगार नहीं मिलने के कारण केन्द्र सरकार को जमकर कोस रहे हैं। आखिर उनका अब भविष्य क्या होगा? कौन उन्हें काम देगा? मजदूरी के अलावा और कोई काम करना भी नहीं आता है।