सैफई महोत्सव में नहीं दिखेगी इस बार तडक भडक !

स्टेटमेंट टुडे न्यूज़ / एजेंसी :

इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव में साल के आखिर दिनों में होने वाला लोकप्रिय सैफई महोत्सव की तडक भडक इस दफा नहीं दिखाई देगी। लोक संस्कृति कला के प्रचार प्रसार के लिए देश भर में विख्यात सैफई महोत्सव विधानसभा चुनावों की आचार संहिता लागू होने की संभावना को देखकर रद्द कर दिया गया है। यह दूसरा मौका है,जब इस महोत्सव को रद्द किया गया है। सैफई महोत्सव समिति के अध्यक्ष और सांसद धर्मेद्र यादव ने बताया कि जिस समय सैफई महोत्सव का समय है उसी दरम्यान विधानसभा चुनाव की आचार संहिता भी लगने की संभावनाएं हैं। ऐसे में सैफई महोत्सव पर निश्चित है फर्क पड़ेगा। इसलिए इस बार सैफई महोत्सव को टाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि सैफई महोत्सव की तैयारियां काफी पहले से कर दी जाती थी।

सभी को महोत्सव की जिम्मेदारियां भी सौंप दी जाती थी, लेकिन इस बार चुनावी आचार संहिता लगने की संभावनाओ के मद्देनजर न तो कोई बैठक बुलाई गई और न ही किसी को कोई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सैफई महोत्सव समिति ने आयोजन के लिए हर साल 26 दिसम्बर की तारीख तय कर रखी है। 26 दिसंबर से 12 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव की धूम पूरे देश में रहती है। महोत्सव के मंच पर देश के जाने माने सिने कलाकार, साहित्यकार और लोक कलाकार कार्यक्रम प्रस्तुत करने आते हैं। इसके समापन पर बालीवुड स्टार नाइट सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र रहती हैं, लेकिन इस बार लोगों को ये चमक दमक नहीं दिखेगी। वर्ष 2012 में भी विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण सैफई महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था।

 महोत्सव समिति के सदस्य दशरथ सिंह यादव ने बताया कि “मुबंई के टुकडे” के रूप मे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव सैफई की पहचान आज से नहीं बल्कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान से होती आ रही है। लोक कला के उत्थान की गरज से सैफई गांव मे हर साल के आखिर में जोरदार समारोह का आयोजन कराया जाता रहा है। सत्ता रहे या ना रहे लेकिन सैफई महोत्सव के नाम से होने वाले समारोह की हनक हमेशा बरकरार रहती है, लेकिन इस बार चुनाव की संभावनाओं के मद्देनजर समिति ने निर्णय लिया है कि सैफई महोत्सव टाल दिया जाए। यादव ने बताया कि ग्रामीण संस्कृति, लोक कला और देशी खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे सैफई महोत्सव के अब तक 18 पायदान पूरे हो चुके। नेताजी के भतीजे रणवीर सिंह ने सैफई महोत्सव की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की थी।

शुरुआत में सैफई महोत्सव में आस-पास के गांव के लोग ही आते थे, लेकिन जैसे जैसे सैफई महोत्सव का सफर आगे बढ़ता गया,यह भव्य रूप लेता गया। पहले महोत्सव बड़े-बड़े शहरों मे आयोजित किए जाते थे, इसलिए जब सैफई जैसे छोटे से गांव में महोत्सव की शुरुआत हुई तो यह लोगों के लिए कौतूहल भरा था। महोत्सव का मतलब है एक जगह पर लोगों की आपस में मुलाकात होना, आपस में बातचीत होना, भाईचारा मजबूत होना और लोगों का मनोरंजन होना। गांवों-देहातों में रहने वाले लोगों के पास पहले मनोरंजन के साधन नहीं होते थे। महोत्सव ही उनके मनोरंजन के साधन हुआ करते थे।