पी0एच0डी0 चेम्बर आॅफ कार्मस की वेटलैण्ड के संरक्षित करने की शुरुआत सराहनीय-आलोक रंजन

स्टेटमेन्ट टुडे / समाचार एजेंसी:
अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, पी0एच0डी0 चेम्बर आॅफ कार्मस एण्ड इण्डस्ट्री, उ0प्र0 द्वारा टर्टल सरवाइवल एलायंस के सहयोग से ‘प्रकृति एक वन्यजीव प्रेमियों का वेटलैण्ड्स के संरक्षण हेतु समागम‘ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन विभाग, सिंचाई विभाग एवं प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भागीदारी की। आज टोटल जेनएक्स कसाया इन, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में अनेक वनजीवन प्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य बिन्दु ‘एडाप्ट ए वेटलैण्ड‘ था, जिसमें अनेक प्रकृति प्रमियों ने अपने समय व संसाधनों से वेटलैण्ड्स के संरक्षण हेतु संकल्प लिया। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक दूसरे रविवार को लखनऊ या इसके समीपवर्ती इलाके में वेटलेण्ड्स की सफाई एवं रखरखाव के साथ-साथ विभिन्न प्रजातियों के अभिलेखीकरण का कार्य किया जाएगा, जिससे भविष्य में इन स्थनों को पर्यटक स्थलों के रुप में भी विकसित किया जा सकेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश के  भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा पी0एच0डी0 चेम्बर के सलाहकार आलोक रंजन ने कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश में  1.2 लाख वेटलेण्ड्स चिन्हित किए है, जिनमें लगभग 12.5 लाख हेक्टेयर भूमि निहित है। उ0प्र0 में 14 पक्षी बिहार एवं 25 महत्वपूर्ण बर्डिंग क्षेत्र हैं, जो वस्तुतः स्वच्छ जल से पूरित आर्द्र भमि है। प्रदेश का राज्य पक्षी सारस है और राज्य पशु बारहसिघां। दोनांे प्रजातियां आर्द्र भूमि से संबंधित है। यद्यपि औद्योगिक, कृषि एवं आवासीय आवश्यकताओं के कारण अब वेटलैण्ड्स का अस्तित्व संकट में है। उन्होंने पी0एच0डी0 चेम्बर आॅफ एण्ड इण्डस्ट्री वेटलैण्ड्स  को संरक्षित करने की इस पहल को सही व सार्थक दिशा में अच्छी  शुरुआत बताया।
इस अवसर पर लखनऊ कैमरा क्लब द्वारा चित्र प्रदर्शनी आयोजित की गई। अनिल रिसाल सिंह, संस्थापक सदस्य, लखनऊ कैमरा क्लब ने अवगत कराया कि प्रदर्शनी में 60 से अधिक दुर्लभ पशु एवं पक्षियों के चित्र है जो उ0प्र0 के लाख बहोसी पक्षी बिहार, सण्डी पक्षी बिहार, दुधवा नेशनल पार्क से संबंधित होने के साथ ओडिसा के प्रसिद्ध वेटलेण्ड मंगलाजोड़ी वेटलेण्ड्स से भी संबंधित है।
इस मौके पर 12 ‘प्रकृति रत्न‘ पुरस्कार उन वन विभाग एवं अन्य नागरिकों को वितरित किए गए, जिन्होंने वेटलेण्ड एवं वन्य जीवन सरंक्षण के लिए विशेष कार्य किया है। इनमें शैलेन्द्र पाल सिंह, वन गार्ड, पटना पक्षी विहार, अवध विहार, रेंज आफिसर, सूट सरोवर पक्षी विहार, रमा शंकर यादव, फारेस्ट, कछुआ विहार, यशवन्त, आर0एफ0ओ0, लाख बहोसी पक्षी विहार, सुरेश पाल सिंह, डिप्टी आर0एफ0ओ0, लाख बहोसी पक्षी विहार, करन ंिसंह, कर्मचारी लाख बहोसी पक्षी विहार, अबु अरशद, आर0ओ, सण्डी पक्षी विहार, अरशद हुसैन, (सारस संरक्षण), अरुनिमा सिंह (कछुआ संरक्षण), सुबोध नन्दन (वेटलेण्ड संरक्षण), जितेन्द्र पटेल (डाल्फिल संरक्षण), राजीव चैहान (वेटलेण्ड संरक्षण के लिए लाइफटाइम पुरस्कार) शामिल हैं।
कार्यक्रम के दूसरे  सत्र की अध्यक्षता एस0के0 उपाध्याय, प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव ने की। प्रथम वक्ता प्रसिद्ध हरपीटाॅलजिस्ट डा0 बी0सी0 चैधरी ने घडियालों के घटते वासों पर चिन्ता व्यक्त  करते हुए उनके संरक्षण की महत्ता पर बल दिया। डा0 विवांश पांडव ने वेटलेण्ड्स की सूची में तराई क्षेत्र के दलदल इलाकों को भी सम्मिलत करने की अपील की जिनमें अनेक विशेष जानवरों जैसे गैंडा, एशियाई हाथी, बाहरसिंघा, हाॅग हिरण का वास होता है। डा0 रथिन वर्मन, निदेशक, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट आॅफ इण्डिया के काजीरंगा मानस क्षेत्र, ने दुधवा के बारहसिघां के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
अंत में एक रोचक पैनल डिस्कशन हुआ। शैलेन्द्र सिंह, निदेशक टर्टल सरवाइवल एलायंस ने विषय प्रवर्तन करते हुए श्रोताओं को वर्ता में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम के अंत में डा0 रुपक डे, प्रमुख उ0प्र0 ने समापन भाषण में पूर्व वक्ताओं के भाषणों के सार का प्रस्तुत करते हुए ने वेटलेण्ड्स की मनुष्यों के अस्तित्व के अलिए अनिवार्यता पर प्रकाश डाला।

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