उ0प्र0 उपखनिज (परिहार) नियमावली-1963 के उल्लंघन करने पर पट्टाधारकों के खिलाफ होगी सख्त एवं दण्डात्मक कार्रवाई -निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म

Statement Today4 years ago166311 min
स्टेटमेन्ट टुडे /Statement Today / समाचार एजेंसी:
अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, प्रदेश सरकार ने राज्य में हो रहे अवैध खनन एवं परिवहन की प्रभावी रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कार्यबल गठित किया है। साथ ही उ0प्र0 उपखनिज (परिहार) नियमावली-1963 मे विहित प्राविधानों को पट्टाधारकों द्वारा उल्लंघन किए जाने पर इनके खिलाफ सख्त एवं दण्डात्मक कार्रवाई किए जाने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए हैं। 
निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म डा0 रोशन जैकब ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार ने अवैध खनन और इसके परिवहन पर प्रभावी रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए हैं और उप खनिज नियमावली के प्राविधानों का सख्ती से अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंनेे बताया कि पट्टाधारकों द्वारा खनन हेतु स्वीकृत क्षेत्र का सीमांकन कराने के बाद यदि सीमास्तम्भों का रख-रखाव ठीक ढंग से न कर स्वीकृत क्षेत्र से बाहर अवैध खनन कराया जा रहा हो, तो इसकी रोकथाम के लिए राजस्व एवं खनन विभाग को नियमित रुप से इन क्षेत्रों का अनुश्रवण कर पट्टाधारकों द्वारा सीमास्तम्भों का रख-रखाव ठीक ढंग से किया जाए, यह सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही नये खनन क्षेत्रों का सीमांकन भी नियमानुसार किया जाए, ताकि इनके द्वारा खनन क्षेत्र से बाहर अवैध खनन न किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि सीमास्तम्भों के निर्माण में पट्टाधारकों द्वारा नियम 59 (3) का उल्लंघन किया जाए, तो प्रतिदिन 25000 रुपये की दर से शास्ति संबंधित जिलाधिकारी द्वारा वसूला जाएगा। उन्होंने बताया कि अवैध खनन एवं परिवहन पर निगरानी रखने के लिए पांच हे0 से बड़े खनन क्षेत्रों के पट्टाधरकों को अपने स्वीकृत क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगाना एवं चेक गेट का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध खनन की सूचना मिलने पर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्यवाही करने के साथ आवश्यक दण्डात्मक कार्यवाही भी की जाएगी। ऐसे पट्टाधारकों द्वारा यदि नियम 59 (3) का उल्लंघन किया जाता है तो 25000 रुपये प्रतिदिन की दर से जिलाधिकारी द्वारा शास्ति वसूली जाएगी।
डा0 जैकब ने जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का संज्ञान लेकर निर्देशित किया है कि यदि पट्टाधारकों द्वारा नदी की जलधारा में लिफ्टर मशीनों का प्रयोग कर उपखनिज की खुदाई करते पाया जाए, तो इनके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाए। साथ ही 05 लाख रुपये की दर से शास्ति भी वसूली जाए। जनप्रतिनिधियों ने शासन से शिकायत की थी कि पट्टाधारकों द्वारा नदी की जलधारा में मशीन लगाकर उपखनिज की खुदाई की जा रही है, जिसका पर्यावरण एवं परिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और नदी की जलधारा में बदलाव से बाढ़ भी आती है। 
निदेशक ने बताया कि पट्टाधारकों द्वारा अनुमोदित खनन योजना और पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र में उल्लिखित मात्रा से अधिक  खनन कार्य करते हुए पाए जाने पर नियम 59 (2) का उल्लंघन माना जाएगा और इनके विरुद्ध प्रति अवसर 50 हजार रुपये की दर से शास्ति जिला मजिस्ट्रेट द्वारा वसूली जाएगी। साथ ही यदि पट्टाधारकों द्वारा अपने वैध खनन क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य स्थान पर खनन किया जाए, तो जिला स्तर पर गठित कार्यबल द्वारा सतत निगरानी करते हुए इस पर प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा और ऐसे सभी अनाधिकृत खनन के लिए नियम-57 का उल्लंघन करने पर प्रति हे0 02 लाख रुपये से 05 लाख रुपये तक का दण्ड अधिरोपित किया जाएगा। खनन पट्टाधारक के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन करते पाए जाने पर शास्ति दण्ड के अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति या ईकाई को काली सूची में भी डाला जाएगा।
उन्होंने बताया कि फर्जी वेबसाइट के माध्यम से भी पट्टाधारकों द्वारा फर्जी  ई.एम.एम.-11 जनरेट कर उपखनिजों का परिवहन किया जा रहा है। ई.एम.एम.-11 की फोटोकापी का दुरुपयोग कर और मुद्रित प्रपत्र-सी पर मैजिक पेन का उपयोग कर अवैध परिवहन करते हुए राजस्व को क्षति पहंुचाई जा रही है। उन्होने निर्देशित किया है कि उपखनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों में प्रयोग होने वाले ई.एम.एम.-11 की नियमित जांच की जाए तथा फर्जी ई.एम.एम.-11 व ई.एम.एम.-11 की फोटाकापी पाए जाने पर एवं मुद्रित प्रपत्र-सी पर मैजिक पेन का उपयोग किए जाने पर संबंधित के खिलाफ एफ.आई.आर. भी दर्ज कराई जाए।