बजट से कुछ भी हासिल नहीं हुआ : विपक्ष, केंद्रीय नेताओं ने कहा कि विकास का रोडमैप मिला।

statementtoday.com3 weeks ago73 min
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सह सम्पादक / जेड ए खान : लखनऊ, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट पेश किया। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने कहा कि इस बजट से कुछ भी नहीं मिला है। वहीं, केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि इससे देश की महिलाओं, युवाओं और किसानों का ध्यान रखा गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट पेश किया। करीब एक घंटे तक चले इस बजट में केद्र सरकार ने कई ऐलान किए। बजट में सूर्योदय योजना शुरू करने, रेलवे के लिए 40 हजार वंदे भारत कोच तैयार करने और स्वदेशी कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए टैक्स छूट जैसी घोषणाएं की गई। अंतरिम बजट में देश को विकसित बनाने के लिए कई घोषणाएं की गई। केंद्रीय मंत्रियों और उद्योग जगत से जुड़े कई लोगों ने बजट को अच्छा बताया, वहीं विपक्षी पार्टियों ने इस बजट को लेकर सरकार पर साधा निशाना। आईए जानते हैं कि अंतरिम बजट 2024 पर किसने क्या कहा।

अंतरिम बजट प्रगतिशील है: अमिताभ कांत

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बजट में महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए बहुत कुछ शामिल किया गया है। इसमें सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। इस अंतरिम बजट का विजन है कि महिलाओं, युवाओं और किसानों के जीवन स्तर में सुधार किया जाए तो पूरे देश का विाकस होगा। अमिताभा कांत ने कहा कि  मैंने इस सरकार के साथ लंबे समय तक काम किया है और मेरा मानना है कि सरकार सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सभी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करती है। यह जाति और पंथ नहीं देखती है। अंतरिम बजट प्रगतिशील है।

यह बजट उत्साहवर्धक: अर्जुन मुंडा

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि पूरे देशवासियों के लिए यह बजट उत्साहवर्धक है। भारत सरकार ने इस बजट के जरिए सबका साथ और सबका विकास और सबका विकास और सबका प्रयास को ध्यान में रखते हुए यह बजट पेश किया है। इस देश को चार स्तंभों में बांटते हुए यह कोशिश है कि इनके माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सके। इस बजट के माध्यम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है समाज के सभी वर्गों का विकास हो।

बजट थोड़ा हैरान करने वाला रहा: नैला लाल किदवई

केंद्रीय अंतरिम बजट 2024 पर, पूर्व अध्यक्ष फिक्की और आईएससी अध्यक्ष  नैना लाल किदवई ने कहा कि बजट थोड़ा आश्चर्यचकित करने वाला रहा, क्योंकि हम में से कई लोग राजकोषीय घाटे को 5.3% पर बनाए रखने की प्रतिबद्धता की उम्मीद कर रहे थे।  सरकार ने 5.1% के राजकोषीय घाटे की घोषणा की है,  जिसे बाजार ने आसानी से स्वीकार कर लिया है। हम नहीं जानते कि वे किस आधार पर मानते हैं कि राजस्व कैसे बेहतर होगा।वहीं, दूसरी ओर, पूंजीगत व्यय में कोई कमी नहीं की गई है।

सरकार ने एक नया जुमला दिया है: आतिशी

अंतरिम बजट 2024-25 पर दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा कि बजट साबित करता है कि यह ‘जुमला’ सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में कहा था कि वह हर साल 2 करोड़ नौकरियां देंगे लेकिन एक करोड़ लोगों को भी नौकरी नहीं मिली। आज उन्होंने एक नया ‘जुमला’ दिया है कि वे 55 लाख नौकरियां देंगे। इस बजट में महंगाई कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

बजट से बीजेपी को नुकसान होगा: सांसद सुशील कुमार

आप सांसद सुशील कुमार ने कहा कि  जब बजट पेश हो रहा था तो देश का नौजवान, पिछड़ा और दलित बहुत उम्मीद से इसे देख रहा था। इस बजट में किसी प्रकार का आंकड़ा नहीं दिया गया है कि कितने नौजवानों को नौकरियां दी गई हैं। कितने युवाओं को नौकरियां दी जाएंगे। किसानों की अगर बात करें तो किसानों से जुड़े आंकड़े गलत पेश किए गए हैं। पंजाब में ही कम से कम 17 लाख किसान हैं। पंजाब में ही बड़े पैमाने पर किसानों को पीएम सम्मान निधि से वंचित रखा गया है। जब पंजाब में यह हालत है तो देश में क्या हालत होगी। इस बजट से देश के लोगों का मन टूटा है। आने वाले चुनाव में बीजेपी को इस बजट से नुकसान होगा।

सरकार अभी भी इनकार की मुद्रा में है: सुप्रिया श्रीनेत

अंतरिम बजट 2024-25 पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार अभी भी इनकार की मुद्रा में है। सरकार समस्याओं को सुधारने की बात तो छोड़ दें इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इस बजट में आम लोगों, रोजगार, कृषि, महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं है। बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने 25 बार प्रधानमंत्री बोला, लेकिन एक बार भी  जॉब्स या रोजगार नहीं बोला। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों का दर्द साफ झलक रहा है। निर्मला सीतारमण कहा कि लोगों की आय 50% बढ़ गई है लेकिन सरकारी डेटा कहता है कि वास्तविक आय 25% कम हो गई है।

सरकार के प्रयासों से लॉजिस्टिक लागत कम हुई: आशीष चौहान

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि जब बजट भाषण पढ़ा जा रहा था, तो मेरे दिमाग में तीन शब्द आए – विकास, कल्याणवाद और राजकोषीय संयम। सभी को हासिल करना बहुत मुश्किल है  एक सरकार के तीन उद्देश्य और उन्होंने पिछले 10 वर्षों में साबित कर दिया है कि कहीं न कहीं वह ऐसा सामाजिक सुरक्षा ढांचा बनाने में सक्षम हैं जो देश के सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध है। पिछले 10 वर्षों में सड़कों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों को विकसित किया गया है। लॉजिस्टिक्स लागत काफी कम हो गई है। यह एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।

बजट में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान: वीके सिंह

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि टैक्स में कोई बदलाव नहीं है,इसका मतलब है कि लोगों को फायदा तो मिल ही रहा है। जिस हिसाब से हम चल रहे हैं, वह विकसित भारत के निर्माण के लिए है। इसमें हर चीज के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया है। इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है।

अर्थव्यवस्था आने वाले दिन में मजबूत हाेगी: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बजट काफी उत्साहजनक है। इस बजट से हमें संकेत मिला है कि हमारी अर्थव्यवस्था आने वाले दिनों में और मजबूत होगी। मौजूदा समय में हमारी अर्थव्यवस्था अभी दुनिया में पांचवे नंबर पर है। हमारी अर्थव्यवस्था का साइज 2027 तक पांच ट्रिलियन से ज्यादा होगी और 2030 तक यह 7 ट्रिलियन से ज्यादा हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने साल 2047 तक देश के लिए जो रोडमैप दिया है हम उस टार्गेट को हासिल करने के प्रति आश्वस्त हैं।

बजट से कुछ भी नहीं मिला:शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह बजट में रिकॉर्ड पर सबसे छोटे भाषणों में से एक था। इससे बहुत कुछ निकल कर सामने नहीं आया। हमेशा की तरह बहुत सारी बयानबाजी, कार्यान्वयन पर बहुत कम ठोस बातें की गई। बजट में कई ऐसी चीजों के बारे में बात की जो अस्पष्ट भाषा में हैं जैसे ‘विश्वास’ और ‘आशा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन इस बजट में आंकडों को लेकर कुछ भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

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